आलोचना से पहले कल्चर को समझें रैपर बादशाह के बचाव में संटी शर्मा ने विरोधियों को दिया करारा जवाब

भारतीय संगीत जगत में इन दिनों ‘हिप-हॉप’ और ‘रैप कल्चर’ को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। मशहूर रैपर बादशाह अक्सर अपने गानों के बोल और स्टाइल को लेकर चर्चा और विवादों में रहते हैं। हाल ही में हुए एक विवाद के बाद अब इंडस्ट्री के उभरते हुए और प्रतिभाशाली रैपर संटी शर्मा (Santy Sharma) खुलकर बादशाह के समर्थन में आए हैं। संटी शर्मा ने न केवल बादशाह का बचाव किया है, बल्कि हिप-हॉप संस्कृति की गहराई को समझाने की भी कोशिश की है।

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विवाद की जड़ और संटी शर्मा का स्टैंड

अक्सर देखा जाता है कि जब भी कोई रैप गाना हिट होता है, तो उसके शब्दों या उसके चित्रण पर उंगलियां उठने लगती हैं। बादशाह के हालिया गानों के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। आलोचकों ने उनके संगीत और लिरिक्स पर सवाल उठाए। लेकिन संटी शर्मा का मानना है कि किसी भी कलाकार की कला को सिर्फ एक चश्मे से देखना गलत है।

संटी शर्मा कहते हैं कि बादशाह ने भारतीय संगीत को ग्लोबल लेवल पर एक नई पहचान दी है। वे मानते हैं कि हिप-हॉप महज मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह भावनाओं को व्यक्त करने का एक सशक्त माध्यम है। संटी के अनुसार, बादशाह जैसे कलाकार कड़ी मेहनत से अपनी जगह बनाते हैं और उनके काम को विवादों में घसीटना कला का अपमान है।

हिप-हॉप संस्कृति: अभिव्यक्ति या विवाद?

संटी शर्मा ने इस बात पर जोर दिया कि भारत में अब भी बहुत से लोग हिप-हॉप संस्कृति की जड़ों को नहीं समझ पाए हैं। वे कहते हैं, “हिप-हॉप एक विद्रोह, एक कहानी और एक सच्चाई है जिसे कलाकार अपने शब्दों के जरिए बयां करता है।” उनके अनुसार, रैप गानों में इस्तेमाल होने वाले शब्द अक्सर उस परिवेश या उस सोच को दर्शाते हैं जिससे कलाकार गुजरता है।

सक्रिय रूप से अपनी बात रखते हुए संटी शर्मा ने कहा कि हमें कलाकारों को कटघरे में खड़ा करने के बजाय उनकी रचनात्मकता का सम्मान करना चाहिए। वे मानते हैं कि जब कोई नया प्रयोग होता है, तो विरोध होना स्वाभाविक है, लेकिन वह विरोध कला के विकास को रोकना नहीं चाहिए।

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बादशाह का संगीत जगत में योगदान

बादशाह ने ‘डीजे वाले बाबू’ से लेकर ‘गेंदा फूल’ और ‘पानी पानी’ जैसे गानों के जरिए बॉलीवुड और स्वतंत्र संगीत (Independent Music) में अपनी धाक जमाई है। संटी शर्मा का तर्क है कि बादशाह ने क्षेत्रीय संगीत और आधुनिक रैप का जो मेल बिठाया है, वह काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने कई नए कलाकारों के लिए रास्ते खोले हैं।

संटी शर्मा ने स्पष्ट किया कि बादशाह के खिलाफ उठने वाली आवाजें अक्सर संगीत की अधूरी समझ का परिणाम होती हैं। वे युवाओं को प्रेरित करते हुए कहते हैं कि हमें संगीत को उसकी रूह से समझना चाहिए, न कि केवल सतही तौर पर शब्दों को पकड़ना चाहिए।

संटी शर्मा: हिप-हॉप के प्रति एक नई सोच

संटी शर्मा खुद भी संगीत की दुनिया में तेजी से उभर रहे हैं। वे मानते हैं कि एक रैपर के तौर पर उनकी जिम्मेदारी है कि वे सही बात के लिए आवाज उठाएं। उन्होंने सोशल मीडिया और विभिन्न साक्षात्कारों में यह संदेश दिया कि हिप-हॉप केवल शोर-शराबा नहीं है। यह उन लोगों की आवाज है जो अपनी बात को बेबाकी से रखना जानते हैं।

उनका कहना है कि बादशाह के खिलाफ हो रही बयानबाजी से हिप-हॉप कम्युनिटी में एक गलत संदेश जाता है। संटी ने अपील की कि श्रोताओं को गानों के पीछे की मेहनत और उस शैली के इतिहास को जानना चाहिए।

santy sharma badshah
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कला और कलाकार की स्वतंत्रता

इस पूरे घटनाक्रम ने अभिव्यक्ति की आजादी पर भी सवाल खड़े किए हैं। संटी शर्मा मजबूती से यह पक्ष रखते हैं कि एक कलाकार को पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए कि वह क्या और कैसे कहना चाहता है। अगर हम कलाकारों को सीमाओं में बांध देंगे, तो संगीत की मौलिकता खत्म हो जाएगी।

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संटी शर्मा के इस समर्थन ने सोशल मीडिया पर भी एक बड़ी बहस को जन्म दे दिया है। जहां एक तरफ लोग बादशाह के आलोचक हैं, वहीं संटी की बातों ने हजारों संगीत प्रेमियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है। लोग अब हिप-हॉप के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा कर रहे हैं।

santy sharma badshah
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क्या हिप-हॉप भविष्य का संगीत है?

आज की पीढ़ी जिस तरह से रैप संगीत को पसंद कर रही है, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि हिप-हॉप संगीत का भविष्य है। संटी शर्मा जैसे युवा कलाकार इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। वे तकनीक और जज्बातों का ऐसा तालमेल बिठाते हैं जो सीधे युवाओं के दिल को छूता है।

संटी शर्मा का बादशाह के लिए खड़ा होना यह भी दिखाता है कि इस इंडस्ट्री में कलाकार एक-दूसरे की मेहनत का सम्मान करते हैं। यह एकता हिप-हॉप को और अधिक मजबूत बनाती है।

संटी शर्मा ने यह संदेश दिया है कि हिप-हॉप को समझने के लिए खुले दिमाग की जरूरत है। बादशाह के प्रति उनका यह समर्थन केवल एक व्यक्ति का समर्थन नहीं है, बल्कि पूरी ‘रैप कम्युनिटी’ के अस्तित्व की लड़ाई है। संगीत प्रेमियों के लिए यह खबर एक रिमाइंडर की तरह है कि कला की कोई सरहद नहीं होती और न ही उसे विवादों की जंजीरों में जकड़ा जा सकता है।

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